श्री कृष्ण लीला – Shri Krishna Leela in Hindi

श्री कृष्ण लीला – Shri Krishna Leela in Hindi

Shri Krishna Leela in Hindi

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श्री कृष्ण मानव रूप में जन्मे और मानव की भांति मृत्यु को भी प्राप्त हुए, और यही वो सबको समझा गये कि जन्म के साथ मृत्यु जुडी है और वो आवश्यक है, जिसका हमें शोक नहीं करना चाहिए, यदि कुछ करना है तो जन्म और मृत्यु के बीच के जीवन को सफल बनाने के लिये श्रेष्ठ कर्म करने चाहिये | मानव को यह समझाने श्री कृष्ण मानव रूप में ही आये |

कृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार और हिन्दू धर्म के ईश्वर माने जाते है | कन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकाधीश, वासुदेव, नैया आदि नामों से भी उनको जाना जाता हैं | कृष्ण का जन्म द्वापरयुग में हुआ था | कृष्ण वसुदेव और देवकी की 8 वीं संतान थे |

श्री कृष्ण जन्म:

कंस श्री कृष्णा के मामा थे | आकाशवाणी हुई कि ”हे कंस”! देवकी की आँठवी संतान तेरा संहार करेगी | उसके बाद वसुदेव और देवकी को कारागार में बन्द कर दिया और सख्त पहरा लगवा दिया |

जैसे ही देवकी ने प्रथम पुत्र को जन्म दिया वसुदेव ने उसे कंस के हवाले कर दिया | कंस ने उसे चट्टान पर पटक कर मार डाला |

इस प्रकार एक-एक करके कंस ने देवकी के सात बालको को निर्दयता पूर्वक कंस ने मार डाला |

भाद्र पद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ उनके जन्म लेते ही जेल ही कोठरी में प्रकाश फैल गया |

वासुदेव जी की हथकडियाँ खुल गई, दरवाजे अपने आप खुल गये पहरेदार सो गये वासुदेव कृष्ण को सूप में रखकर गोकुल की और चलने लगे |

तृणाव्रत  वध :

कंस ढूंढ-ढूंढ कर नवजात शिशुओं का वध करवाने लगा | कंस ने राक्षस तृणावर्त को मथुरा भेजा जहाँ वो सकट का रुप धारण करके भगवान श्री कृष्ण को मारने के

लिए उनके ऊपर आ गया तो भगवान् श्री कृष्ण के चरण स्पर्श होते ही सकट के टूटने और वायु के गुबारे रूप में आए तृणाव्रत दैत्य का भगवान् के द्वारा अंत हो गया |

 

कालिया नाग का वध:

यमुना नदी में कालिया नाग रहता था | कालिया नाग के एक सौ सिर थे| कालिया नाग ने  विष से यमुना का जल ज़हरीला हो गया|

उसे पीकर गाय और गोप मरने लगे| एक बार जब खेलते समय गेंद यमुना में गिर जाने से कृष्ण उसे निकालने के लिए यमुना में कूदे |

कालिया नाग ने कृष्ण को अपने जहर से अचेत करने का प्रयास किया लेकिन कृष्ण पर कालिया नाग के जहर का कोई असर नहीं हुआ | दोनों में काफी देर तक युद्ध हुआ |

कृष्ण ने आखिर में कालिया नाग को परास्त किया और उसका वध करने के लिए अपना सुदर्शन निकाला तो कालिया नाग की धर्मपत्नियों ने कृष्ण से जीवनदान की याचना

की और कृष्ण ने इस शर्त पर की कालिया नाग यमुना को सर्वदा के लिए छोड़कर चला जाएगा, उसे जीवन दान दे दिया |

गोवर्धन पर्वत :

अन्नकूट पर देवराज इन्द्र की पूजा होती थी | इससे इन्द्र को अभिमान हो गया था | बृजवासियों का मानना था कि इन्द्र ही उनके लिए वर्षा करते हैं|

कृष्ण ने कहा कि इंद्र की वजह से नहीं, गोवर्धन पर्वत की वजह से बृजभूमि धनधान्य से भरपूर रहती है |

उनके कहने पर बृजवासियों ने इन्द्र के स्थान पर गोवर्धन की पूजा की |इससे क्रुद्ध होकर इन्द्र ने अपने मेघों को आदेश दिया कि वे वर्षा से बृजभूमि को डुबो दें|

घनघोर वर्षा शुरू हुई तो बृजवासी घबराकर कृष्ण की शरण में गए | कृष्ण ने उन्हें अभय करते हुए कहा कि अब गोवर्धन ही उनकी सहायता करेंगे|

कृष्ण ने अपनी तर्जनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया | सभी बृजवासी उसके नीचे आ गए| पूरे सात दिनों तक वर्षा होती रही, लेकिन बृजवासियों का वह कुछ भी नहीं बिगाड़ सकी|

 

इस तरह की कई कृष्णा लीलाए श्री कृष्णा के बारे में प्रचलित है |

भगवान् श्री कृष्ण अजर और अमर हैं |

वो हम लोगो के ह्रदय में निवास करते हैं |

कि इस संसार में जिसने जन्म लिया है | उसकी मृत्यु निश्चित है चाहे वह इंसान हो या भगवान् यह कथन स्वंय भगवान् का ही है |

 

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