My Best Friend Essay in Hindi -मेरा प्रिय मित्र

My Friend Essay In Hindi, मेरा प्रिय मित्र निबंध, Essay On My Best Friend In Hindi, Short Essay on ‘My Best Friend’ in Hindi’

Short Essay on ‘My Best Friend’ in Hindi’

माता पिता के बाद अगर हमारे सबसे करीब अगर कोई होता है, तो वो होता है, हमारा दोस्त | दोस्ती एक एसा रिश्ता होता है, जो खून के रिश्ते से भी बढ़कर होता है | हमारे जीवन में हमारा परिवार जितना महत्रपूर्ण होता है, उतना ही महत्रपूर्ण हमारा दोस्त होता है |

हमारे सुख, दुःख, अच्छे बुरे समय में हमारे दोस्त ही होते है, जो साथ देते है | अगर जीवन में हमारा कोइ दोस्त/मित्र नहीं है तो हमारा जीवन अधुरा है |

आज एसे ही मित्र, दोस्त के बारे में आज हम आपको निबंध बताने वाले है | मेरा प्रिय मित्र ! इस विषय पर निबंध लिखना है, लेकिन हमारे जीवन में एक ही प्रिय मित्र नहीं है, एक से बढ़कर भी मित्र हो सकते है | लेकिन यहाँ पर हम सिर्फ एक ही मित्र को प्रिय मित्र मानकर  essay लिखने वाले है |

मेरा प्रिय मित्र / My Best Friend Essay In Hindi

मेरे प्रिय मित्र का नाम “सचिन” है | सचिन और मै बचपन से ही मित्र है | सचिन मेरी ही उम्र का है | सचिन और मैंने एक ही स्कूल में पढाई की है |

सचिन हमारे घर में सामने की रहता है | सचिन के बावजूद मेरे कई और मित्र है, लेकिन सचिन उनमे सबसे प्रिय मित्र है , क्यों की वह सबसे अलग है | सचिन बेहत ही शांत स्वभाव का लड़का है | सचिन के पिताजी एक सरकारी बैंक में बड़े अफसर है | घर में धन-दौलत की कोई कमी नहीं है , लेकिन सचिन को उसकी अमीरी का जरा सा भी घमंड नहीं है |

सच्ची दोस्ती में ना की कोई अमीरी-गरीबी देखता है | सच्ची दोस्ती के यही लक्षण होते है, जो बुरे समय में आपका साथ दे वही सच्चा दोस्त होता है |

सचिन और में एक ही स्कूल में पढ़े, आगे कॉलेज भी एक ही साथ किया | सचिन आगे चल के देश की सेवा करना चाहता है, वो फ़ौज में जाना चाहता है |

सचिन का favorite खेल क्रिकेट है | स्कूल छुटने के बाद सचिन और मै ग्राउंड में क्रिकेट खेलने जाते थे |

एक सच्चे मित्र के पास जितने गुण होने चाहिए वो सभी गुण सचिन में है, इसलिए सचिन मेरा प्रिय मित्र है | कैसे चलिए आपको एक घटना के बारे में बताते है :

My Friend Essay In Hindi

जब हम स्कूल में थे, तब हमारी दसवी कक्षा की बोर्ड एग्जाम की फीस जमा करनी थी, लेकिन हमारी घर की आर्थिक सिस्थी कुछ ठीक नहीं थी, पिताजी एक किसान थे, और उस साल फसल भी कुछ अच्छी नहीं आई थी, इसी वजह से पिताजी ने मुझे फीस के फैसे बाद में देता हु एसा कहा था |

लेकिन बोर्ड एग्जाम फीस देने की आखिरी 2 दिन ही बचे थे, उस दिन सचिन ने अपने एग्जाम फीस के पैसे साथ लाए थे, और उसको किसी से पता चल गया की मैंने अभी तक फीस जमा नहीं की है | सचिन हमारे घर के हालात जानता था, उसने एक समय भी ना लगाते हुए, हमारे टीचर के पास जाकर मेरी फीस जमा कर दी |

लेकिन उसने अपने फीस जमा नहीं की, इसलिए टीचर सचिन पर गुस्सा हुए | फिर सचिन ने दुसरे दिन अपने पिताजी से पैसे लाकर खुद की भी फीस जमा कर दी |

इसी घटना से आप समझ सकते है, की एक दोस्त क्या होता है | सच्चा दोस्त खुद के बारे में बाद में सोचता है, लेकिन पहले अपने दोस्त के बारे में सोचता है |

इसलिए सचिन मेंरा सबसे प्रिय मित्र है |

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